Thursday, December 9, 2021

कंप्यूटर का इतिहास

                                           कंप्यूटर  का  इतिहास 


पहले  मनुष्य गणना  के  लिए  अपनी अंगुलिओं  का इस्तमाल करता था  और  संख्याओं को मेन्युअली  संशोधित करता  था  परन्तु तकनीकी  विकास  ने  तीव्र  कंप्यूटिंग  डिवाइस  की  माँग  की ा  इसी माँग ने कंप्यूटर  के  निर्माण का मार्ग प्रसस्त किया ा  हजारो वर्षो के इतिहास को अबेकस और  पर्स्नल कंप्यूटर जैसे दो डिवाइसेस के दोवारा प्रथक  किया गया ा इसका वर्णन निम्नानुसार  कर सकता है :
  

(1):-   अबेकस   

                            अबेकस का उपयोग 5000 बी .सी पूर्व  में गिगने और गणना करने के लिए किया जात था  चित्र में अबेकस बताया गया है। इसका आकार एक प्रेम जैसा है , जिसमे निश्चित दुरी पर बहुत लाइने (बार ) है।  प्रत्येक बार में कुछ  मोती(बीडस ) होते थे।  प्रत्येक बार में इधर -उधर घूम सकते थें।  प्रत्येक मोती नंबर सिस्टम में एक स्तिथि दर्शाता था  दिए गए चित्र में यह दर्शाया गया की 45968  को अबेकस में कैसे दर्शाया जाता है। 
 दाहिने हाथ का प्रत्येक मोती एक निश्चित इस्तिथि को प्रदर्शित करता हे।  प्रत्येक बार (लाइन ) इकाई , दहाई ,
, सैकडा,,,, दर्शाती है। 


नेपीएस  बोन्स 

                             स्कॉटलैंड के गणितज्ञ जॉन नेपियर ने एक उपकरण खोजा जो  उनकी  विद्या की श्रमकारी गणनाओ को हल करने में मदद करता है।  इसके लिए उन्होंने 9 स्ट्रिप्स ऑफ़ बोन (हड्डियों  की  पट्टियां ) का उपयोग  किया जिसे नापिएर्स बॉन कहा  गया और जिन्हे 10 के वर्ग में बता गया।  पुनः प्रत्येक वर्ग को दो भागो में बता गया।  निचे का आधा भाग यूनिट्स (इकाई ) और ऊपर का आधा भाग टेनस (दहाई ) को दर्शाता है।  इसे चित्र में दर्शाया गया हे। इन्होने वर्गो को भरने के लिए गुना के सिदांत का उपयोग किया था।  इस चार्ट की सहायता वे गुणन की सभी क्रियाओ को हल कर सके। 


(2 ) मिडिल ऐज  कंप्यूटर    


                          मकेनिकल कम्पुयटर सन 1930 के दशक में बनना शुरू हुआ। z1 एक बाईनेरी नंबर सिस्टम पर आधारित कंप्यूटर था।  जिसे कोनार्ड जूसे ने सन 1938 में जर्मनी में बनाया था।  इसके पश्चात सन 1941 में Z 3 कंप्यूटर बाना जिसमे अंकगणितय इकाई बनाने के लिए इलेक्ट्रोमेकेनिकल बाईनेरी सुईचेस के रूप में रिलेस का उपयोग किया गया। 
                                मई सन 1944 हर्वर्ड यूनिवेर्सिटी के प्रोफ़ेसर  हर्वर्ड आइकेन ने IBM के साथ मिलकर पहला इलेक्ट्रोमेकेनिकल डिजिटल कंप्यूटर बनाया था। यह ऑटोमेटिक सीक्वेंस कंट्रोल्ड केलकुलेटर था। तथा  उनका नाम , 'हर्वर्ड मार्क -1 'था। जॉन जॉन बी. एटनासाफ आइवा स्टेट यूनिवर्सिटी का ऐसा व्यक्ति था जिसने वॉल्व का उपयोग करके सन 1930 में पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर बनाया तथा यह 1942 में पूरा हुआ। इसमें एक ऐड -सबट्रेक्ट इकाई थी। व् इसका आकार छोटा था।  इसमें लगभग 300 वाल्व उपयोग किये गए थे।  इसकी मेमोरी इकाई केपेसीटर की बानी हुई थी ,जो एक घूमते घूमते हुए ड्रम पुर लगी हुई थी यह अपने ऑपरेशन के लिए बाईनेरी नंबर का उपयोग करती थी। प्रतियेक केपेसीटर बाईनेरी का एक अंक संग्रह कर सकता था। पंचकार्ड के या कार्ड रीडर के साथ इनपुट /ऑउटपुट  उपकरण थे।           




























































          


























  

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